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Showing posts from June 20, 2016

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

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                                   योगा का महत्त्व मशीनीकरण व भौतिकीकरण के आज के युग में मनुष्य की जीवन शैली विकृत हो चुकी है,  जिसका फल विभिन्न प्रकार की शारीरिक, व मानसिक बिमारियों के रूप में मनुष्य भुगत रहा है |  किसी को कब्ज, अस्थमा, सिरदर्द, किसी को तनाव | तो आईये इन सारी बिमारियों से मुक्ति पाने के लिए हम योग का महत्त्व समझें | इसे किसी भी उम्र के व्यक्ति, गरीब-अमीर, सबल-निर्बल,  स्त्री-पुरुष सभी कर सकते हैं | योग में हम प्राणायाम, सूक्ष्म व्यायाम, एवं योगासन का समावेश करते हैं |सर्वप्रथम हम प्राणायाम के महत्त्व एवं विधि को समझें | प्राणायाम :- प्राण अर्थात सांस + आयाम याने दो सांसों में दूरी बढ़ाना | श्वासों को नियंत्रित करके रोकने की और निकालने की क्रिया को प्राणायाम कहा जाता है | श्वास को धीमी गति से गहरा खींचकर रोकना व बाहर निकालना प्राणायाम के क्रम में आता है | श्वास अन्दर खींचने के साथ प्राणशक्ति, श्रेष्ठता, आरोग्यता श्वास के द्वारा अन्दर खींचे जा रहे हैं ऐस...

seva kaise kare?

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                                      सेवा कैसे करे ? इस संपूर्ण मानवजाति की सेवा ही साधना है|किन्तु सेवा किस प्रकार हो तो वह साधना बन जाये ? सेवा विस्तार करने के भाव से नहीं बल्कि सम्पूर्ण जीवों का कल्याण हो इस भाव से करनी चाहिए | सेवा अपना नाम उज्वल करने के लिये नहीं बल्कि जन जन के मन में सेवा का भाव जगाने के लिए करनी चाहिए |सेवा अपने अहंकार को मिटने के लिए होती है|अपना साम्राज्य फ़ैलाने के लिए नहीं होती है|                       हां ! सेवा निस्वार्थ भाव से करते करते अपने आप जब मानव समाज जुड़े वह बात अलग है किन्तु,इतना विस्तार हो इसलिए सेवा करे यह भावना गलत है |दिन-दुखियों के दुःख दूर करने के लिए एवं मधुर मुस्कान उनके मुख पर आये इस भाव से ही सेवा करे |कर्ताभाव मिटने के लिए ,अहंकार रहित होने के लिए इस विश्व को आनंदित रखने के लिए ,सर्वत्र खुशहाली लाने  के लिए सेवा हो हमसे |..........!         ...

kichen organic home farm

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             हमारी प्यारी बहनों का किचेन ऑर्गेनिक फार्म  आधुनिक तरीके से खेती करने के कारण दैनंदिन उपयोग में आनेवाली सब्जियां खाद ,यूरिया ,सल्फेड से युक्त होती है |जिसके प्रभाव एवं सेवन से शारीरिक रोग उत्पन्न होते है |और हमारे शरीर को जो उपयोगी हो ऐसे तत्त्व नहीं मिलते |क्या ?हम सभी चाहते है?,की हमे पोषण युक्त हरी सब्जियां मिले जिससे परिवार का ,समाज का,स्वास्थ्य सुदृढ़ रहे तो आईये ,,,एक संकल्प करते है की हम अपने घर में ही एक ओर्गानिक फार्म बनाये और सब्जियां उगाना शुरू करे |अपने घर के बगीचे में अथवा मिटटी या प्लास्टिक के बड़े और फ्लैट गमले में सब्जियां  उगा सकते है |                                                                       घर में उगने जैसी सब्जियां  १)हरा धनिया   2)पालक  ३)मेथी  ४)बैंगन  ५)टमाटर  ६)गिलकी  ७)तुरैया ...

आंवला है असरकारक औषधि

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                आँवला       आयुर्वेद शास्त्रों में आंवला रसायन द्रव्यों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है | इसे अमृतफल व धात्रीफल आदि कहा गया है, क्योंकि इसके सेवन से बुढ़ापा मनुष्य पर अपना प्रभाव नहीं डाल पाता है | आँवले में नारंगी से २० गुना अधिक विटामिन-सी पाया जाता है |       आंवला एक ऐसा श्रेष्ठ फल है जो वात-पित्त-कफ तीनों दोषों का शमन करता है तथा आँखों के लिए हितकारी और विषम ज्वर नाशक है | इसमें गैलिक एसिड, टैनिक एसिड, निर्यास, शर्करा, एल्ब्यूमिन, सेल्यूलोस तथा कैल्शियम पाए जाते हैं | आँवला मधुर, अम्ल, कड़वा, तीखा व कसैला इन पांच रसों की शरीर में पूर्ति करता है | इसके सेवन से स्मृति, कांति एवँ बल बढ़ता है | ह्रदय एवं मस्तिष्क को शक्ति मिलती है |       शास्त्रों में आँवले का सेवन पुण्यदायी माना गया है | अतः स्वस्थ हो या बीमार आँवले का किसी न किसी रूप में सेवन करना चाहिए |            

ginger is healthful (home medecine)

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स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक है : अदरक      अदरकadrak आँतों के लिए सर्वोत्तम दवा है | पेट की शायद ही कोई ऐसी बीमारी हो जो इससे ठीक न हो सके | यह भोजन के पूर्व का  ` एपिटाइजर’ माना जाता है | भोजन से पूर्व इसका रस सेवन करने से गले एवं जीभ का शोधन होता है | अदरक को गीली मिट्टी में दबाकर रखने से लम्बे समय तक ताजा बनाया रखा जा सकता है |      प्रतिदिन भोजन से पहले सेंधा नमक के साथ इसके कचूमर का सेवन करने से जहाँ स्वास्थय बना रहता है, वहीँ जठर में पाचक रसों की वृद्धि होने के साथ भूख भी खुलकर लगती है व गैस नहीं बनती |      मानव देह में कच्ची आंव के कारण पेट के विभिन्न रोग उत्पन्न होते हैं | आंव यानी कच्च अनपचा अन्न | इसके दीर्घ समय तक मानव देह में बने रहने से तमाम रोग उत्पन्न होते हैं | आंव की मात्रा में अत्यधिक वृद्धि होने से जहाँ कब्ज व गैस उत्पन्न होती है, वहीँ कमर दर्द, संधिवात, सिरदर्द, अनिद्रा एवं अपच आदि रोग उत्पन्न होते हैं | विभिन्न रोगों के जनक आंव के निष्कासन में अदरकdrak के रस का सेवन आश्चर्यजनक रूप से कारगर ...

faast is important for good health

                       उपवास       अमेरिका में स्थित इंटर माउंट सेंटर हार्ट इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं ने २०० से ज्यादा लोगों पर रिसर्च की और पाया कि थोड़े-थोड़े अन्तराल के नियमित उपवास स्वास्थय के लिए अच्छे हैं | इससे डायबिटीज और दिल के रोग का खतरा कम हो जाता है | उपवास के दौरान शरीर में ट्राइग्लीसराइड्स नामक वसा, ब्लड शुगर और वजन तीनों का स्तर घट जाता है | उपवास से गुड कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तथा बैड कोलेस्ट्रोल घटता है | रिसर्च के प्रमुख बेंजामिन हर्ने कहते हैं कि उपवास से शरीर में भूख और खिंचाव पैदा होता है, इसके बदले में शरीर ज्यादा कोलेस्ट्रोल रिलीज करता है, और इंधन के लिए ग्लूकोज की बजाय वसा का उपयोग करता है| इससे शरीर में वसा की कोशिकाएं कम हो जाती हैं | शरीर में वसा कोशिकाएं जितनी कम होंगी वह इंसुलिन के प्रतिरोध या डायबिटीज के खतरे को उतना ही कम करेगा | नई रिसर्च से शरीर के भीतर एक मेटाबोलिक प्रोटीन ह्युमन ग्रोथ हार्मोन Hपर उपवास के प्रभावों की पुष्टि हुई | यह हार्मोन चुस्त मांसपेशियों और मेटाबोल...

pati patni ek dusre ke sath kaise rhe

जिस घर में नारी का सम्मान व अध्यात्म का आदरसहित पूजन होता है, वह घर स्वर्ग समान ही नहीं बल्कि तीर्थ ही है |      और जिस नारी में (स्त्री) अध्यात्म की गंगा बहती हो ऐसी नारी गृहस्थ का, घर का, संसार का एवं समाज का मंगल करने की क्षमता रखती है | वह तो फिर धरती पर स्वयं पूजित मंगलकारिणी मातृदेवी है |      किन्तु आज समाज के हालात कुछ अलग अंदाज बताते है, कही स्त्री पर अत्याचार तो कही स्त्रीत्व के अतिरेक से पुरूषों पर अत्याचार यह घटनायें सामान्य सी हो चुकी है | इसका कारण भी बहुत सूक्ष्म है | जो स्थूल बुद्धि से परे है |      कभी ऐसा भी समय था कि पुरूषों द्वारा स्त्री पर अन्याय, अत्याचार हुआ करता था | आज के समय में भी हो रहा है किन्तु आज स्त्री सबल भी तो बन चुकी है उसके बावजूद भी स्त्री पर अत्याचार या उसका शोषण होना यह आश्चर्यजनक बात है |      अगर पुरूष सबल है तो उसके ऊपर कोई स्त्री अन्याय, शोषण नहीं कर सकती इतनी आसानी से | आज ऐसी दुर्घटनाएँ क्यों ? क्या समाज का आदर्श ऐसे स्थापित होगा ?   ...

vat savitri vrat vidhi kaise kre jaane

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                वट सावित्री व्रत 2016 (Vat Savitri Vrat 2016) वर्ष 2016 में वत सावित्री व्रत 19-20 जून को रखा जाएगा। वट सावित्री व्रत विधि (Vat Savitri Vrat Vidhi in Hindi) वट सावित्री व्रत के दिन दैनिक कार्य कर घर को गंगाजल से पवित्र करना चाहिए। इसके बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य भरकर ब्रह्माजी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। ब्रह्माजी के बाईं ओर सावित्री तथा दूसरी ओर सत्यवान की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। इसके बाद टोकरी को वट वृक्ष के नीचे ले जाकर रख देना चाहिए। इसके पश्चात सावित्री व सत्यवान का पूजन कर, वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पण करना चाहिए। पूजन के समय जल, मौली, रोली, सूत, धूप, चने का इस्तेमाल करना चाहिए। सूत के धागे को वट वृक्ष पर लपेटकर तीन बार परिक्रमा कर सावित्री व सत्यवान की कथा सुने। पूजन समाप्त होने के बाद वस्त्र, फल आदि का बांस के पत्तों में रखकर दान करना चाहिए और चने का प्रसाद बांटना चाहिए।

yuvatiyon ke vivah hetu stotra

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                                  कुंवारी/अविवाहित युवतियों के लिए– अच्छे वर प्राप्ति हेतु स्तोत्र— कन्या को वर मिलने के लिये इस स्तोत्र के ग्यारह पाठ नित्य एक मण्डल  (इकतालीस दिन )  तक पूर्ण आस्था व विश्वास के साथ करना चाहिये सिय रघुवीर बिबाहु , जो सप्रेम गावहिं सुनाहिं। तिन्ह कहॅु सदा उछाहु , मंगायतन राम जसु।। चौपाई:- कोमल चित अति दीन दयाला। कारन बिनु रघुनाथ कृपाला।। जानहु ब्रह्मचर्य हनुतन्ता। शिव स्वरूप सो भी भगवन्ता।। जो रघुपति चरणन चित लावे। तेहि सम धन्य न आन कहावे।। रामकथा सुन्दर करतारी। संसय बिहंग उडावनि हारी।। उमा रमा ब्रह्मादि बन्दिता। जगदम्बा मनिंदिता संतत अनन्दिता।। पूजा कीन्ह अधिक अनुरागा। निज अनुरूप सुभग बरू मांगा।। सादर सिय प्रसाद सिर धरेऊ। बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ।। जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु सन्देहू।। सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिह मन कामना तुम्हारी।। पति अनुकूल सदा रह सीता। सोभा खानि सुसील विनीता।। रंगभुमि ज...