faast is important for good health
उपवास
अमेरिका में स्थित इंटर माउंट सेंटर हार्ट इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं ने २०० से ज्यादा लोगों पर रिसर्च की और पाया कि थोड़े-थोड़े अन्तराल के नियमित उपवास स्वास्थय के लिए अच्छे हैं | इससे डायबिटीज और दिल के रोग का खतरा कम हो जाता है | उपवास के दौरान शरीर में ट्राइग्लीसराइड्स नामक वसा, ब्लड शुगर और वजन तीनों का स्तर घट जाता है | उपवास से गुड कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तथा बैड कोलेस्ट्रोल घटता है | रिसर्च के प्रमुख बेंजामिन हर्ने कहते हैं कि उपवास से शरीर में भूख और खिंचाव पैदा होता है, इसके बदले में शरीर ज्यादा कोलेस्ट्रोल रिलीज करता है, और इंधन के लिए ग्लूकोज की बजाय वसा का उपयोग करता है| इससे शरीर में वसा की कोशिकाएं कम हो जाती हैं | शरीर में वसा कोशिकाएं जितनी कम होंगी वह इंसुलिन के प्रतिरोध या डायबिटीज के खतरे को उतना ही कम करेगा | नई रिसर्च से शरीर के भीतर एक मेटाबोलिक प्रोटीन ह्युमन ग्रोथ हार्मोन Hपर उपवास के प्रभावों की पुष्टि हुई | यह हार्मोन चुस्त मांसपेशियों और मेटाबोलिक संतुलन की रक्षा करता है | उपवास के दौरान यह हार्मोन महिलाओं में १३०० गुना तथा पुरुषों में २००० गुना बढ़ जाता है |
यूँ तो रोगों को दूर करने के लिए एलोपेथी, होम्योपेथी, यूनानी, आयुर्वेदिक आदि अनेकानेक चिकित्सा पद्धतियाँ हैं तथापि उनके उपचार के लिए उपवास एक जबरदस्त प्राकृतिक साधन है | प्राकृतिक चिकित्सकों ने यह सिद्ध व प्रमाणित कर दिखाया है कि उपवास द्वारा घातक से घातक रोग भी दूर किये जा सकते हैं | उपवास शरीर के समस्त विकारों को जला देनेवाला सबसे सही उपाय है |
आयुर्वेद में उपवास की व्याख्या इस प्रकार दी गई है :-
‘आहारं पचती शिखी, दोषान् आहारवर्जिता: |’
अर्थात् जठराग्नि के रूप में शरीर में स्थित जीवनी शक्ति भोजन को पचाती है | यदि भोजन न ग्रहण किया जाय तो भोजन के पचाने से मुक्त हुई शक्ति शरीर से विकार को निकालती है | उपवास में भोजन न मिलने से बढ़े हुए वात, पित्त, तथा कब्ज भस्म हो जाते हैं | आत्मज्योति जाग्रत होती है | मन की सारी बीमारियाँ, वासना, इर्ष्या, द्वेष, घृणा, क्रोध, काम, लोभ आदि जलकर नष्ट हो जाते हैं |
अध्यात्मिक दृष्टि से उपवास का महत्व बहुत अधिक है | विषय विकारों के शमन का उपाय बताते हुए गीताकार ने कहा है :-
“विषय विनिवर्तन्ते निराहाराय्देहिन:|”
अर्थात् निराहार रहने से विषय विकारों की निवृत्ति होती है | ‘फिलोसोफी ऑफ़ फास्टिंग’ ‘उपवास दर्शन’ के विद्वान रचयिता श्री ए.ए. प्यूरिगठन ने लिखा है कि रोग चाहे शारीरिक हो अथवा मानसिक, उपवास से सभी में लाभ होता है | उपवास से नैतिक व अध्यात्मिक प्रगति होती है | नैसर्गिक बुद्धि का उदय होता है | रोग निवारण, आत्म विश्वास की प्राप्ति, प्रेम की विशालता की दिव्य अनुभूति, विराट के साथ आत्म सामंजस्य आदि का महत्वपूर्ण प्रसाधन उपवास ही है |
विश्व के हर धर्म चाहे वो बाईबल हो कुरान, रामायण हो या पुराण, प्रत्येक धार्मिक ग्रंथ में उपवास को चिकित्सा पद्धति एवं धार्मिक कर्मकाण्ड के रूप में स्वीकार किया गया है |
बीमारी में उपवास का अधिक महत्त्व बढ़ जाता है क्योंकि सब रोगों की जड़ पेट ही है और जब तक पेट साफ़ न हो तब तक शरीर की किसी भी बीमारी को दूर नहीं किया जा सकता है | अतः पेट की सफाई व मन की शांति के लिए लम्बा उपवास आवश्यक है |
उपवास शरीर की ख़राब कोशिकाओं को पुनर्जीवन देकर स्वस्थ अवस्था में लाता है | उपवास स्वास्थय का विज्ञान है, धर्म का विज्ञान है, सौंदर्य का विज्ञान है, मन तथा आत्मा का विज्ञान है | इच्छा शक्ति जगाने तथा बढ़ाने का विज्ञान है|
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