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Showing posts from June 26, 2016

सफल दांपत्य जीवन के उपाय

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                  आदर्श दाम्पत्य जीवन    शास्त्रों में गृहस्थाश्रम को सारे आश्रमों का मूल कहा गया है | हमारी संस्कृति में जिन सोलह संस्कारों का महत्त्व है उनमें विवाह संस्कार सर्वोपरि है | विवाह परिवार के मंदिर का मुख्य द्वार है | परिवार से तात्पर्य निजी संबंधों को सुनियोजित व्यवस्था और जीवन यापन के लिए किये गए समन्वित प्रयासों से है और दायित्व जिसके मूल में है |       पति-पत्नी के रिश्ते को मन-वचन, कर्म, धर्म से निभाना होता है | आज के भौतिकवादी युग में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से इस रिश्ते में व्यापक परिवर्तन आ रहा है जिसके कारण इस रिश्ते में जहर घुल रहा है |       दाम्पत्य जीवन की आधारशिला है प्रेम, त्याग, समर्पण, सहयोग, सद्भावना, संस्कार, सौम्यता, शिष्टाचार, समदृष्टिकोण, क्षमाशीलता जैसे सद्गुण जो सतत प्रयासों की प्रक्रिया है | हम आपको कुछ ऐसी बातों से अवगत कराते हैं जिससे आपका दाम्पत्य जीवन सुखी हो सकता है :- १)       दाम्पत्य जीवन में प्रेम ...
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                         सौ रोग दूर करती है सौंठ  सौंठ एक अच्छी घरेलु औषधि भी है | यह कई तरह के छोटे मोटे रोग आसानी से दूर कर देती है | इसके गुण इस प्रकार हैं :- जुकाम से छुटकारा पाने के लिए सौंठ और गुड़ पानी में डालकर उबालें | जब चौथाई रह जाय तब थोड़ा ठंडा करके छान कर पी जाएँ, लाभ होगा | ह्रदय दुर्बल हो, धड़कन कम हो, दिल बैठता सा लगे तो सौंठ का गर्म काढ़ा नमक मिलाकर एक प्याला प्रतिदिन पीने से लाभ होता है | पेशाब के समय दर्द और रक्त आता हो तो सौंठ पीसकर छान लें | फिर दूध में थोड़ी सौंठ और मिश्री मिलाकर सेवन करने से लाभ होगा | पसली में बार-बार दर्द सताने पर सौंठ 25 ग्राम (पाउडर) आधा लीटर पानी में उबालकर छान कर दिनभर में तीन बार सेवन करें दर्द दूर हो जायेगा | हाथ पैर बार-बार सुन्न होने लगे तो सौंठ और लहसुन की एक-एक गाँठ पानी में डालकर पीस लें | जो अंग सुन्न हो, उस पर इसका लेप करें, प्रातः बिना कुछ खाए-पिए जरा-सी सौंठ और लहसुन की दो कलि चबाएं | यह प्रयोग सप्ताह भर तक करें लाभ होने लगेगा | शोथ, बवासीर और पान्डु रोग ...

AAPKE SWASTHYA KE LIYE

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                                थायराइड गले में स्थित यह ग्रंथि शरीर के मेटाबोलिज्म का नियंत्रण करने के साथ अनेकानेक महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन करती है | आज इसकी बीमारी से पीड़ितों की संख्या अधिक है और केवल भ्रम तथा अवैज्ञानिक जानकारी के चलते हम रोग को और बढ़ा रहे हैं | थायरोइड हार्मोन्स के कारण दो प्रकार के विकार होते हैं | अंतः स्त्रावी ग्रंथियों के विकारों के कारण हार्मोन का असंतुलन – जब ग्रंथियां आवश्यकता से अधिक या कम मात्रा में हार्मोन स्त्राव करती हैं | अंतः स्त्रावी ग्रंथियों की विकृति – जब ग्रंथियों में कुछ निर्माणजन्य विकृति आ जाये या किसी प्रकार की अतिरिक्त वृद्धि या क्षय हो जाये, जिससे हार्मोन का स्तर प्रभावित न होता हो | अंतः स्त्रावी ग्रंथियों के स्त्राव अतिमहत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए शरीर में एक फीडबैक मैकेनिज्म भी होता है, जो इन स्त्रावों को शरीर के लिए आवश्यकतानुरूप कार्य करने हेतु सन्देश प्रदान करता है | यह रक्त में हार्मोन के स्तर को नियमित करने का काम करता है | जब यह फीडबै...