AAPKE SWASTHYA KE LIYE
थायराइड
गले में स्थित यह ग्रंथि शरीर के मेटाबोलिज्म का नियंत्रण करने के साथ अनेकानेक महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन करती है | आज इसकी बीमारी से पीड़ितों की संख्या अधिक है और केवल भ्रम तथा अवैज्ञानिक जानकारी के चलते हम रोग को और बढ़ा रहे हैं |
थायरोइड हार्मोन्स के कारण दो प्रकार के विकार होते हैं |
अंतः स्त्रावी ग्रंथियों के विकारों के कारण
हार्मोन का असंतुलन – जब ग्रंथियां आवश्यकता से अधिक या कम मात्रा में हार्मोन स्त्राव करती हैं |
अंतः स्त्रावी ग्रंथियों की विकृति – जब ग्रंथियों में कुछ निर्माणजन्य विकृति आ जाये या किसी प्रकार की अतिरिक्त वृद्धि या क्षय हो जाये, जिससे हार्मोन का स्तर प्रभावित न होता हो |
अंतः स्त्रावी ग्रंथियों के स्त्राव अतिमहत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए शरीर में एक फीडबैक मैकेनिज्म भी होता है, जो इन स्त्रावों को शरीर के लिए आवश्यकतानुरूप कार्य करने हेतु सन्देश प्रदान करता है | यह रक्त में हार्मोन के स्तर को नियमित करने का काम करता है | जब यह फीडबैक तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तब इस कम या अधिक हार्मोन को न तो रक्त से बाहर निकाल पाता है, न इसे नियमित कर पाता है |
इस गड़बड़ी के कारण इस प्रकार हो सकते हैं :-
कोई बड़ी बीमारी २) ग्रंथि का अकार्यक्षम होना ३) संक्रमण ४) आघात या क्षत
५) किसी अन्य ग्रंथि के कारण होनेवाला प्रभाव |
इस हार्मोन के कम स्त्राव के कारण हाइपोथायराइडिज्म तथा अधिक स्त्राव के कारण हायपरथायराइडिज्म होता है |
थायराइड के मरीज का आहार किस तरह से होना चाहिए |
नमक
थायराइड के लिए आयोडीन की विशेष आवश्यकता होती है | नमक आयोडीन की पूर्ति का सबसे आसान माध्यम है | इसलिए आयोडाइज्ड साल्ट का यदि सेवन करें तो अलग से कुछ लेने की जरुरत नहीं होती है | समुद्री नामक में आयोडीन नहीं होता है | आयुर्वेद में हर जगह लवण के सेवन में सैंधव लवण की बात कही है जिसका वर्तमान समय में नकारा जाना बिमारियों का कारण बन चुका है |
पत्तेवाली सब्जियाँ
पालक और अन्य पत्तेवाली भाजी में मैग्नीशियम और अन्य लवण पर्याप्त मात्रा में होते हैं | ये शरीर की क्रिया के लिए आवश्यक होते हैं | याददाश्त और मस्तिष्क के विकास के साथ-साथ मांसपेशियों की ऐंठन, थकावट और ह्रदय की गति का नियंत्रण भी मैग्नीशियम के कारण होता है |
समुद्री खाद्य
मछली, केकड़ा, समुद्री घास ये सब आयोडीन के सर्वोत्तम स्त्रोत हैं | कैल्प नामक समुद्री खाद्य में सबसे अधिक आयोडीन होता है, इसलिए हाइपर के रोगी को कदिपी नहीं खाना चाहिए | समुद्र के तटीय प्रदेशों के लिए अलग खाद्य व्यवस्था होती है, जो मैदानी लोगों के लिए उपयोगी नहीं हो सकती |
ग्वाइटरोजेन्स
ग्वाइटरोजेन्स वे द्रव्य होते हैं, जो थायराइड ग्लैंड को अधिक आयोडीन लेने से रोकते हैं | पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली और ब्रेसेल्स स्प्राउट्स ऐसे पदार्थ हैं, जिनमें ग्वाइटरोजेनिक प्रभाव होता है | इसलिए जिन रोगियों को थाय्रोइडीस्म है, इनके सेवन से बचना चाहिए |
किस शरीर को किस मात्रा में आयोडीन की आवश्यकता है, इसका निर्धारण चिकित्सक के परामर्श से मिल सकता है | कही सुनी बातों से आहार व्यवस्था का निर्धारण ही आज बिमारियों को बढ़ा रहा है |
सोया
सोया में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होती है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए कम कीमत में उत्तम उर्जा प्रदान कर सकती है | सोया दूध में थायराइड की गतिविधियों में हस्तक्षेप करने की क्षमता होती है | यदि आप सही मात्रा में आयोडीन नहीं ले रहे हैं, तो यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है |
दाने या नट्स
काजू, बादाम तथा मगज़ के बीज मैग्नीशियम के उत्तम स्रोत होते हैं | कुछ नट्स में तो मैग्नीशियम के साथ-साथ सेलिनियम भी पाया जाता है | ब्राजीलियन नट्स इसका सबसे उत्तम उदाहरण है | यह अल्प मात्रा में ही बहुत प्रभावी होता है | आयुर्वेद की दवाओं में चपल धातु के रूप में सेलिनियम का प्रयोग करने का निर्देश मिलता है |
ग्लूटेन
यह गेहूं, जौ आदि में पाया जानेवाला प्रोटीन है | आहार में सबसे अधिक कारबोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है जिसके लिए गेहूं और चावल का ही प्रयोग किया जाता है | ग्लूटेन से थायरोइड को ओवर एक्टिवेशन मिलता है पर यदि ठीक तरह से गेहूं या जौ का सेवन करें, तो यह लाभकारी होता है |
आहारक्रम
आहार के समग्र निर्धारण में इस बात का ध्यान रखें कि किस तेजी से शरीर इसका उपयोग और अवशोषण करता है | इसका उत्सर्जन वह किस प्रकार करता है | यह ध्यान रखकर यदि आप अपना आहारक्रम बनाते हैं तो चिकित्सकों की कम से कम आवश्यकता पड़ेगी | अपने देश और क्षेत्र के अनुरूप आहार चुनें |
गले में स्थित यह ग्रंथि शरीर के मेटाबोलिज्म का नियंत्रण करने के साथ अनेकानेक महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन करती है | आज इसकी बीमारी से पीड़ितों की संख्या अधिक है और केवल भ्रम तथा अवैज्ञानिक जानकारी के चलते हम रोग को और बढ़ा रहे हैं |
थायरोइड हार्मोन्स के कारण दो प्रकार के विकार होते हैं |
अंतः स्त्रावी ग्रंथियों के विकारों के कारण
हार्मोन का असंतुलन – जब ग्रंथियां आवश्यकता से अधिक या कम मात्रा में हार्मोन स्त्राव करती हैं |
अंतः स्त्रावी ग्रंथियों की विकृति – जब ग्रंथियों में कुछ निर्माणजन्य विकृति आ जाये या किसी प्रकार की अतिरिक्त वृद्धि या क्षय हो जाये, जिससे हार्मोन का स्तर प्रभावित न होता हो |
अंतः स्त्रावी ग्रंथियों के स्त्राव अतिमहत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए शरीर में एक फीडबैक मैकेनिज्म भी होता है, जो इन स्त्रावों को शरीर के लिए आवश्यकतानुरूप कार्य करने हेतु सन्देश प्रदान करता है | यह रक्त में हार्मोन के स्तर को नियमित करने का काम करता है | जब यह फीडबैक तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तब इस कम या अधिक हार्मोन को न तो रक्त से बाहर निकाल पाता है, न इसे नियमित कर पाता है |
इस गड़बड़ी के कारण इस प्रकार हो सकते हैं :-
कोई बड़ी बीमारी २) ग्रंथि का अकार्यक्षम होना ३) संक्रमण ४) आघात या क्षत
५) किसी अन्य ग्रंथि के कारण होनेवाला प्रभाव |
इस हार्मोन के कम स्त्राव के कारण हाइपोथायराइडिज्म तथा अधिक स्त्राव के कारण हायपरथायराइडिज्म होता है |
थायराइड के मरीज का आहार किस तरह से होना चाहिए |
नमक
थायराइड के लिए आयोडीन की विशेष आवश्यकता होती है | नमक आयोडीन की पूर्ति का सबसे आसान माध्यम है | इसलिए आयोडाइज्ड साल्ट का यदि सेवन करें तो अलग से कुछ लेने की जरुरत नहीं होती है | समुद्री नामक में आयोडीन नहीं होता है | आयुर्वेद में हर जगह लवण के सेवन में सैंधव लवण की बात कही है जिसका वर्तमान समय में नकारा जाना बिमारियों का कारण बन चुका है |
पत्तेवाली सब्जियाँ
पालक और अन्य पत्तेवाली भाजी में मैग्नीशियम और अन्य लवण पर्याप्त मात्रा में होते हैं | ये शरीर की क्रिया के लिए आवश्यक होते हैं | याददाश्त और मस्तिष्क के विकास के साथ-साथ मांसपेशियों की ऐंठन, थकावट और ह्रदय की गति का नियंत्रण भी मैग्नीशियम के कारण होता है |
समुद्री खाद्य
मछली, केकड़ा, समुद्री घास ये सब आयोडीन के सर्वोत्तम स्त्रोत हैं | कैल्प नामक समुद्री खाद्य में सबसे अधिक आयोडीन होता है, इसलिए हाइपर के रोगी को कदिपी नहीं खाना चाहिए | समुद्र के तटीय प्रदेशों के लिए अलग खाद्य व्यवस्था होती है, जो मैदानी लोगों के लिए उपयोगी नहीं हो सकती |
ग्वाइटरोजेन्स
ग्वाइटरोजेन्स वे द्रव्य होते हैं, जो थायराइड ग्लैंड को अधिक आयोडीन लेने से रोकते हैं | पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली और ब्रेसेल्स स्प्राउट्स ऐसे पदार्थ हैं, जिनमें ग्वाइटरोजेनिक प्रभाव होता है | इसलिए जिन रोगियों को थाय्रोइडीस्म है, इनके सेवन से बचना चाहिए |
किस शरीर को किस मात्रा में आयोडीन की आवश्यकता है, इसका निर्धारण चिकित्सक के परामर्श से मिल सकता है | कही सुनी बातों से आहार व्यवस्था का निर्धारण ही आज बिमारियों को बढ़ा रहा है |
सोया
सोया में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होती है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए कम कीमत में उत्तम उर्जा प्रदान कर सकती है | सोया दूध में थायराइड की गतिविधियों में हस्तक्षेप करने की क्षमता होती है | यदि आप सही मात्रा में आयोडीन नहीं ले रहे हैं, तो यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है |
दाने या नट्स
काजू, बादाम तथा मगज़ के बीज मैग्नीशियम के उत्तम स्रोत होते हैं | कुछ नट्स में तो मैग्नीशियम के साथ-साथ सेलिनियम भी पाया जाता है | ब्राजीलियन नट्स इसका सबसे उत्तम उदाहरण है | यह अल्प मात्रा में ही बहुत प्रभावी होता है | आयुर्वेद की दवाओं में चपल धातु के रूप में सेलिनियम का प्रयोग करने का निर्देश मिलता है |
ग्लूटेन
यह गेहूं, जौ आदि में पाया जानेवाला प्रोटीन है | आहार में सबसे अधिक कारबोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है जिसके लिए गेहूं और चावल का ही प्रयोग किया जाता है | ग्लूटेन से थायरोइड को ओवर एक्टिवेशन मिलता है पर यदि ठीक तरह से गेहूं या जौ का सेवन करें, तो यह लाभकारी होता है |
आहारक्रम
आहार के समग्र निर्धारण में इस बात का ध्यान रखें कि किस तेजी से शरीर इसका उपयोग और अवशोषण करता है | इसका उत्सर्जन वह किस प्रकार करता है | यह ध्यान रखकर यदि आप अपना आहारक्रम बनाते हैं तो चिकित्सकों की कम से कम आवश्यकता पड़ेगी | अपने देश और क्षेत्र के अनुरूप आहार चुनें |


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