शकुंतला को दिया गया उपदेश
शकुंतला को दिया गया उपदेश प्रसिद्द चक्रवर्ती सम्राट भरत की माता शकुन्तला ऋषि कण्व की पुत्री थी | राजा दुष्यन्त से विवाह होने के उपरान्त कण्व ने उसे जो उपदेश दिया है उसी का उल्लेख महाकवि कालिदास ने ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ में किया है | वह उपदेश वधु के लिये गृहस्थाश्रम में पत्नी के कर्तव्यों का ज्ञान करानेवाला साररूप वर्णन है | ऋषि कण्व के उपदेश को कालिदासजी ने एक श्लोक के द्वारा प्रस्तुत किया है | शश्रूषस्व गुरून् कुरु प्रियसखीवृत्तिं सपत्नीजने, भर्तुर्विप्रकृता S पि रोषणतया मा स्म प्रतीपं गम : | भूयिष्ठं भव दक्षिणा परिजने भाग्येष्वनुत्सेकिनी, यान्त्येव...


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