JANMASHTAMI ARTICLE.........
‘कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम्’ जन्माष्टमी के शुभ दिवस पर इस धरती में एक ऐसी दिव्य चेतना अवतरित हुई जिसने अपनी लीलाओं और अपने ज्ञान के द्वारा विश्व में जगतगुरु होने का सर्वोच्च पद प्राप्त किया | भगवान श्री कृष्ण माखन चुराते हुए और गोपियों के साथ लीला रचाते हुए जिस समता में स्थित रहते हैं उसी समता में वे कुरुक्षेत्र की रणभूमि में युद्ध करते हुए भी स्थित रहते हैं | जीवन के हर उतार-चढ़ाव में श्री कृष्ण समवान रहे | कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी मुस्कुराते हुए स्वीकार करनेवाले और युद्धभूमि के कोलाहल पूर्ण वातावरण में भगवद् गीता का उपदेश करने वाले भगवान् श्री कृष्ण के चरणों में हम नमन करते हैं | प्राणिमात्र के जीवन पथ को रोशन करने, प्रगति के पथ अग्रसर करने के लिए श्रीमद् भगवद् गीता जैसा दूसरा कोई मार्गदर्शक नहीं है |१८ अध्याय और ७०० श्लोकों वाला यह अद्भुत ग्रंथ है | यह वह ज्ञान है जो भगवान श्री कृष्ण के श्रीमुख से अर्जुन को महाभारत की युद्धभूमि कुरुक्षेत्र में सुनने को मिला ...