sanskruti ko sanjoye rakhna hai sabka kartavya
नारी सादगी भोलापन और शर्म ही भारतीय स्त्री की पहचान है, मत त्यागो इन्हें यही हमारे देश का स्वाभिमान है | हे नारी मत भूल तू अपने दिव्य संस्कार, जिसके आगे करता है ईश्वर भी नमस्कार | त्याग तपस्या और क्षमा हैं नारी के आभूषण, इनसे युक्त होकर ही होता नारी चरित्र विलक्षण | देशभक्ति कहते हैं आज़ाद हम हुए, पर ये कैसी आज़ादी, भूल अपनी संस्कृति को गए, ये कैसी बरबादी, हर एक दिल में संस्कृति के बीज फिर से बोना है, भारत को विश्वगुरु बनाने अब हम सबको जगना है | भगत सिंह, आज़ाद, शिवाजी को फिर से आना होगा, अपनी रगों में इन जैसे मातृभूमि का प्रेम जगाना होगा बरसों से सोई हुई चेतना को अब फिर से जगना है भारत को विश्वगुरु बनाने अब हम सबको जगना है उठो मानव आँखें खोलो जागो अपनी महिमा में क्यों इस कदर सोये हुए हो गहरी नींद अविद्या में ऋषि मुनि के ज्ञान को अब जन-जन तक पहुँचाना है भारत को विश्वगुरु बनाने अब हम सबको जगना है अलग अलग हैं दीप मगर है सबका एक उजाला, सबके सब मिल काट रहे हैं अंधकार का जाला...