सफल दांपत्य जीवन के उपाय
आदर्श दाम्पत्य जीवन
शास्त्रों में गृहस्थाश्रम को सारे आश्रमों का
मूल कहा गया है | हमारी संस्कृति में जिन सोलह संस्कारों का महत्त्व है उनमें
विवाह संस्कार सर्वोपरि है | विवाह परिवार के मंदिर का मुख्य द्वार है | परिवार से
तात्पर्य निजी संबंधों को सुनियोजित व्यवस्था और जीवन यापन के लिए किये गए समन्वित
प्रयासों से है और दायित्व जिसके मूल में है |
पति-पत्नी
के रिश्ते को मन-वचन, कर्म, धर्म से निभाना होता है | आज के भौतिकवादी युग में
पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से इस रिश्ते में व्यापक परिवर्तन आ रहा है जिसके
कारण इस रिश्ते में जहर घुल रहा है |
दाम्पत्य
जीवन की आधारशिला है प्रेम, त्याग, समर्पण, सहयोग, सद्भावना, संस्कार, सौम्यता,
शिष्टाचार, समदृष्टिकोण, क्षमाशीलता जैसे सद्गुण जो सतत प्रयासों की प्रक्रिया है
| हम आपको कुछ ऐसी बातों से अवगत कराते हैं जिससे आपका दाम्पत्य जीवन सुखी हो सकता
है :-
१)
दाम्पत्य जीवन
में प्रेम बढ़ाने के लिए निंदा या आलोचना से बचें, प्रशंसा करें |
२)
गल्ती हो जाय तो
क्षमा मांग लें और परिजनों से गल्ती हो तो उन्हें क्षमा कर दें |
३)
चेहरा सदैव
लुभावना और मुस्कुराता हुआ रखें और भीतर से भी प्रसन्न रहने की कोशिश करें |
४)
किये हुए वादों
को निभाकर परिजनों का विश्वास सदा कायम रखें |
५)
आपसी मतभेद या
कलह के समय त्याग व समर्पण की भावना रखें |
६)
शिक्षा का अभिमान
और अपने-अपने कैरियार के प्रति बढ़ते रुझान की समस्या केवल समझदारी और सामंजस्य से
हल हो सकती है |
७)
महत्त्वाकांक्षाओं
को त्याग दें, जितना मिले उतने में संतोष मानने का स्वभाव बनाएँ |
८)
पति को परमेश्वर
समझना आज के समय में पिछड़ापन समझा जाता है | फिर भी यदि पत्नी को सही अर्थों में
सहभागिनी समझें और पति को जीवन साथी समझें तो भी गृहस्थी सुखमय हो सकती है |
९)
आचार, विचार,
व्यव्हार में पारदर्शी होना चाहिए | किसी तरह की शंका-कुशंका, गलत धारणा को स्थान
नहीं देना चाहिए |
१०)
अच्छाइयाँ और
बुराइयाँ सभी में होती हैं | अच्छाइयों पर दृष्टि रखकर बुराइयों को नजरअंदाज करें
|
११)
एक-दूसरे की
भावनाओं को समझें और उनका सम्मान करें |
१२)
विचारों का
आदान-प्रदान करें और एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें |
१३)
किसी घटना के बाद
उसका अवलोकन किसी पक्षपात रहित व्यक्ति से करवाएँ जिससे अपनी-अपनी गल्ती समझ में
आये और उसका निराकरण भी हो सके |
१४)
जब भी मुसीबतों
या चुनौतियों का सामना करना पड़े तो निराशा छोड़कर एक दूसरे का हौंसला बढायें |
१५)
पत्नी अगर पति से
किसी क्षेत्र में आगे बढ़ती हो तो इर्ष्या के बजाए उसे प्रोत्साहन दें | यही बात पत्नी
के लिए भी लागू होती है |
एक भटकता है तो दूसरे को संभालना पड़ता है | घर
दीवारों से नहीं बल्कि उसमें रहनेवालों के सुसंस्कारित विचारों से बनता है | दाम्पत्य
जीवन में शांति, समृद्धि, कीर्ति का ख़जाना तो केवल भारतीय संस्कृति में ही पाया
जाता है |
safal dampatya jivan shiv parvati


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