अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

                                   योगा का महत्त्व

मशीनीकरण व भौतिकीकरण के आज के युग में मनुष्य की जीवन शैली विकृत हो चुकी है,
 जिसका फल विभिन्न प्रकार की शारीरिक, व मानसिक बिमारियों के रूप में मनुष्य भुगत रहा है |
 किसी को कब्ज, अस्थमा, सिरदर्द, किसी को तनाव | तो आईये इन सारी बिमारियों से मुक्ति पाने
के लिए हम योग का महत्त्व समझें | इसे किसी भी उम्र के व्यक्ति, गरीब-अमीर, सबल-निर्बल,
 स्त्री-पुरुष सभी कर सकते हैं |
योग में हम प्राणायाम, सूक्ष्म व्यायाम, एवं योगासन का समावेश करते हैं |सर्वप्रथम हम प्राणायाम के महत्त्व एवं विधि को समझें |

प्राणायाम :- प्राण अर्थात सांस + आयाम याने दो सांसों में दूरी बढ़ाना | श्वासों को नियंत्रित करके रोकने की और निकालने की क्रिया को प्राणायाम कहा जाता है | श्वास को धीमी गति से गहरा खींचकर रोकना व बाहर निकालना प्राणायाम के क्रम में आता है | श्वास अन्दर खींचने के साथ प्राणशक्ति, श्रेष्ठता, आरोग्यता श्वास के द्वारा अन्दर खींचे जा रहे हैं ऐसी भावना करें और छोड़ते समय यह भावना करें कि हमारी सारी बिमारियाँ, बुरे विचार प्रश्वास के साथ बाहर निकल रहें हैं | हम साँस लेते हैं तो सिर्फ हवा नहीं लेते, उसके साथ सारी उर्जा को उसमें खींचते हैं | जो साँस आपके पूर्ण शरीर को चलाना जानती है, वह आपके शरीर को तंदुरुस्त रखना भी जानती है |
प्राणायाम गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ अथवा ॐकार के जप के साथ किया जाना चाहिए | इससे मानसिक शांति एवं आरोग्यता की प्राप्ति शीघ्र होती है |

ॐ भू: भूर्व: स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गोदेवस्य धीमहि धियो योन: प्रचोदयात्

सावधानियाँ :-
     प्राणायाम करते समय कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए जिससे अधिक लाभ हो |
सबसे पहले तीन बातों की आवश्यकता है, विश्वास, सत्यभावना, द्रढ़ता |
प्राणायाम करने से पहले हमारा शरीर अन्दर से और बाहर से शुद्ध होना चाहिए |
बैठने के लिए भूमी पर आसन बिछाना चाहिए |
बैठते समय रीढ़ की हड्डियाँ एक पंक्ति में अर्थात सीधी होनी चाहिए |
प्राणायाम करते समय सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन इनमें से जिस आसन में आप देर तक बैठ सकते हैं उसीमें बैठें | प्राणायाम करते समय हाथों को ज्ञानमुद्रा या अन्य मुद्रा में रखें |
प्राणायाम करते समय हमारे शरीर पर कहीं भी तनाव नहीं होना चाहिए |
प्राणायाम करते समय शक्ति का अतिक्रमण ना हो |
हर साँस का आना-जाना बिलकुल आराम से होना चाहिए |
जिन्हें हाई या लो ब्लड प्रेशर है उन्हें ब्लड प्रेशर नॉर्मल होने के बाद धीमी गति से प्राणायाम करना चाहिए |
यदि ऑपरेशन हुआ हो तो छ: महीने बाद ही प्राणायाम का धीरे धीरे अभ्यास करें |
मासिक अवस्था में प्राणायाम ना करें | केवल साँसों को नियंत्रित करने का अभ्यास करें |
हर साँस के आने-जाने के साथ मन ही मन ॐ कार का जप करें, जिससे आपको अध्यात्मिक, मानसिक एवं शारीरिक लाभ मिलेगा |
साँस लेते समय किसी एक चक्र पर ध्यान केन्द्रित करें, जिससे एकाग्रता बढ़ेगी |
साँस लेते समय ईश्वर से प्रार्थना करें कि “हमारे शरीर के सारे रोग नष्ट हों और हमारे शरीर में ओज, तेजस्विता, उर्जा एवं आरोग्यता की प्राप्ति हो |
केवल बिमार लोगों को ही नहीं बल्कि निरोग व्यक्ति को भी प्राणायाम करना चाहिए |
आज हम ७ प्रकार के प्राणायाम का अभ्यास करेंगे |
भस्रिका प्राणायाम
  
लाभ :- 
 ह्रदय को सशक्त बनाता है |
 फेफड़ों को सशक्त बनाता है |
 मस्तिष्क की बिमारियों को मिटाता है |
 पार्किन्सन, पेरालीसिस, लूलापन दूर करता है |
विधि :- 
सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठें | नाक से लम्बी साँसे फेफड़ों में भरें, फिर लम्बी साँस फेफड़ों से ही मुँह के द्वारा छोड़ें | छोड़ते समय एक सा दबाव बना रहे | इसमें गलतियाँ ना हो इसका ध्यान रखें | एक तो हम पूरी साँस नहीं लेते, दूसरा हमारी साँस पेट में चली जाती है | हमें यहाँ साँस को पेट में नहीं बल्कि फेफड़ों में भरना है | फेफड़ों में जैसे हवा शुद्ध करने की प्रणाली है वैसे पेट में नहीं है | कुछ पाकर हमें जैसे ख़ुशी प्राप्त होती है वैसे ही हमें प्राणायाम करते समय ख़ुशी होनी चाहिए, और क्यों ना हो ? सारी जिन्दगी का स्वास्थ्य आपको जो मिल रहा है | आपके पञ्चविध प्राण सशक्त हो रहें हैं | शरीर सशक्त और निरोग हो रहा है |
इसे पहले ५ बार करें, फिर धीरे धीरे बढ़ाएं |
२) कपालभाती प्राणायाम 
लाभ :-
बालों की सारी समस्याओं का समाधान प्राप्त होता है |
चेहरे की झुरियां, आखों के निचे के डार्क सर्कल मिट जाते हैं| 
थायरोइड की समस्या मिट जाती है |
सभी प्रकार के चर्मरोग में लाभकारी है |
आँखों की सभी प्रकार की समस्या मिट जाती है, आँखों की रौशनी लौट आती है |
दांतों की सभी प्रकार की समस्या मिट जाती है | पायरिया जैसी बीमारी ठीक हो जाती है |
इस प्राणायाम से शरीर की चर्बी घटती है, यह इस प्राणायाम का सबसे बड़ा फायदा है| 
कब्ज, एसिडिटी, गैस्टिक जैसी पेट की सभी समस्याएँ मिट जाती हैं |
यूट्रस (महिलाओं) की सभी समस्याओं का समाधान होता है |
डायबिटीस पूर्णतया ठीक होता है |
कोलेस्ट्रोल को घटाने में सहायक है |
सभी प्रकार की एलर्जियाँ मिट जाती है |
शरीर में हिमोग्लोबिन बनता है |
कैल्शियम तैयार होता है |
किडनी स्वत: स्वच्छ होती है, डायलेसिस करने की जरुरत नहीं पड़ती | 

 अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की सभी भाई बहनों को हार्दिक शुभकामनाये 

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