pati patni ek dusre ke sath kaise rhe

जिस घर में नारी का सम्मान व अध्यात्म का आदरसहित पूजन होता है, वह घर स्वर्ग समान ही नहीं बल्कि तीर्थ ही है |
     और जिस नारी में (स्त्री) अध्यात्म की गंगा बहती हो ऐसी नारी गृहस्थ का, घर का, संसार का एवं समाज का मंगल करने की क्षमता रखती है | वह तो फिर धरती पर स्वयं पूजित मंगलकारिणी मातृदेवी है |
     किन्तु आज समाज के हालात कुछ अलग अंदाज बताते है, कही स्त्री पर अत्याचार तो कही स्त्रीत्व के अतिरेक से पुरूषों पर

अत्याचार यह घटनायें सामान्य सी हो चुकी है | इसका कारण भी बहुत सूक्ष्म है | जो स्थूल बुद्धि से परे है |
     कभी ऐसा भी समय था कि पुरूषों द्वारा स्त्री पर अन्याय, अत्याचार हुआ करता था | आज के समय में भी हो रहा है किन्तु आज स्त्री सबल भी तो बन चुकी है उसके बावजूद भी स्त्री पर अत्याचार या उसका शोषण होना यह आश्चर्यजनक बात है |
     अगर पुरूष सबल है तो उसके ऊपर कोई स्त्री अन्याय, शोषण नहीं कर सकती इतनी आसानी से |
आज ऐसी दुर्घटनाएँ क्यों ? क्या समाज का आदर्श ऐसे स्थापित होगा ?

     शास्त्र भी कहते है कि एक गृहस्थ रूपी रथ के दो पहिये है पुरूष – स्त्री | अगर एक भी डावाँडोल हो गया पहिया तो रथ रास्ते पर ही गिर जायेगा |

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