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शकुंतला को दिया गया उपदेश
शकुंतला को दिया गया उपदेश प्रसिद्द चक्रवर्ती सम्राट भरत की माता शकुन्तला ऋषि कण्व की पुत्री थी | राजा दुष्यन्त से विवाह होने के उपरान्त कण्व ने उसे जो उपदेश दिया है उसी का उल्लेख महाकवि कालिदास ने ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ में किया है | वह उपदेश वधु के लिये गृहस्थाश्रम में पत्नी के कर्तव्यों का ज्ञान करानेवाला साररूप वर्णन है | ऋषि कण्व के उपदेश को कालिदासजी ने एक श्लोक के द्वारा प्रस्तुत किया है | शश्रूषस्व गुरून् कुरु प्रियसखीवृत्तिं सपत्नीजने, भर्तुर्विप्रकृता S पि रोषणतया मा स्म प्रतीपं गम : | भूयिष्ठं भव दक्षिणा परिजने भाग्येष्वनुत्सेकिनी, यान्त्येव...
महिला संत जीवन चरित्र
भक्त बहिणाबाई महाराष्ट्र में तीन शताब्दी पूर्व सन-१६२८ में स्त्री संत बहिणाबाई का उज्जवल जीवन चरित्र प्रकाश में आया | सुप्रसिद्ध एल्लोरा की गुफाओं वाले क्षेत्र में वेरुल के निकट देवगांव है | वहाँ से इस जीवन कथा का आरम्भ हुआ | यह स्थान प्राचीन काल से देवताओं की नगरी कहलाता है | शिव नदी पास ही निरंतर बहती है | तीर्थ स्नान के लिए यह स्थान अन्य पवित्र तीर्थ स्थानों के सामान ही पवित्र एवं महत्त्वपूर्ण माना गया है | इसी कारण इसे लक्ष तीर्थ के नाम से जाना जाता है | महर्षि अगस्त्य ने वरदान दिया था कि इस तीर्थ पर जो भी भक्तगण आकर स्नान, पूजन व प्रार्थना करेंगे उन्हें मनोवांछित फल प्राप्त होगा | इसी पवित्र देवगांव में आउजी कुलकर्णी नामक एक ब्राह्मण रहते थे | वह सीधे सरल एवं भाग्यशाली व्यक्ति थे | उनकी पत्नी जानकीबाई एक श्रेष्ठ गृहिणी थी | इनकी कोई संतान नहीं थी | इसी कारण इस दम्पत्ति ने लक्ष तीर्थ पर संतान प्राप्ति हेतू पूज...

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