shrimad bhagvadgita importance
श्रीमद् भगवत गीता का महत्त्व
जहाँ श्री गीता की पुस्तक हो और जहाँ श्री गीता का पाठ होता हो वहाँ प्रयागादी सर्व तीर्थों का वास होता है | जो मनुष्य श्री गीता के दस, सात, पाँच, चार, तीन, दो, एक या आधे श्लोक का पाठ करता है वो अवश्य दस हजार वर्षों तक चंद्रलोक में निवास करता है | केवल “गीता” उच्चारण करने मात्र से सद्गति होती है |
गीता, गंगा, गायत्री, सीता, सत्या, सरस्वती, ब्रह्मविद्या, ब्रह्मवल्ली, त्रिसन्ध्या, मुक्तागेहिनी, अर्धमात्रा, चिदानंदा, भवघ्नी, भयनाशिनी, वेदत्रयी, परा, अनंता और तत्त्वार्थ ज्ञानमंजरी (तत्त्वरूपी अर्थ के ज्ञान का भंडार), गीता के इन अट्ठारह नामों का स्थिर मन से जो मनुष्य नित्य जप करता है वो जल्दी ज्ञान सिद्धि और परमपद प्राप्त करता है |
जो मनुष्य श्राद्ध में पितृओं के उद्धार के लक्ष्य से गीता का पाठ करता है उसके पितृ संतुष्ट होते हैं और नरक से छूटकर सद्गति प्राप्त करते हैं | गीता के पाठ से प्रसन्न हुए तथा श्राद्ध द्वारा तृप्त हुए पितृ पुत्र को आशीर्वाद देकर पितृलोक में जाते हैं | जो मनुष्य गीता को लिखकर गले में, हाथ में या मस्तक में धारण करता है उसके सर्व विघ्न एवँ दारुण उपद्रवों का नाश होता है |

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